***मैं तुझे चूमना चाहता हूँ***
मैं नही जानता की किस अधिकार से...,
लेकिन चाहता हूँ की बस एक बार प्यार से...,
मैं तुझे चूमना चाहता हूँ ।।
हाँ बस तुझे चूमना चाहता हूँ ।।
नही जानता की क्या अधिकार है तुझपे मेरा।।
नही चलता है खुद पर भी अब जोर नही मेरा।।
सब कुछ भुलाकर अब यही दोहराना चाहता हूँ।।
मैं तुझे चूमना चाहता हूँ।।
जानता हूँ की ये सब तेरे लिए आसान नही है।।
तू खुद अब इस बात से अनजान नही है।।
मगर इस सब से दूर मैं तुझको ले जाना चाहता हूँ।।
मैं तुझे चूमना चाहता हूँ।।
जाने अनजाने किया मैंने खुदसे एक वादा है।।
मैं तो बस धूल हूँ , और तू कोई "माथा" है।।
हाँ इस धूल को तेरे माथे सजाना चाहता हूँ।।
मैं तुझे चूमना चाहता हूँ।।
हाँ बस तुझे चूमना चाहता हूँ।।
*****सौरभ शर्मा*****
मैं नही जानता की किस अधिकार से...,
लेकिन चाहता हूँ की बस एक बार प्यार से...,
मैं तुझे चूमना चाहता हूँ ।।
हाँ बस तुझे चूमना चाहता हूँ ।।
नही जानता की क्या अधिकार है तुझपे मेरा।।
नही चलता है खुद पर भी अब जोर नही मेरा।।
सब कुछ भुलाकर अब यही दोहराना चाहता हूँ।।
मैं तुझे चूमना चाहता हूँ।।
जानता हूँ की ये सब तेरे लिए आसान नही है।।
तू खुद अब इस बात से अनजान नही है।।
मगर इस सब से दूर मैं तुझको ले जाना चाहता हूँ।।
मैं तुझे चूमना चाहता हूँ।।
जाने अनजाने किया मैंने खुदसे एक वादा है।।
मैं तो बस धूल हूँ , और तू कोई "माथा" है।।
हाँ इस धूल को तेरे माथे सजाना चाहता हूँ।।
मैं तुझे चूमना चाहता हूँ।।
हाँ बस तुझे चूमना चाहता हूँ।।
*****सौरभ शर्मा*****
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