एक दिन पूछा उन्होने मुझसे कि किसे चाहते हो ज्यादा,
खुदको या मुझको,
मैं क्या कहता क्या उत्तर देता,
कैसे बतलाता ये राज,
कि मैं तो मर चूका हूँ कबका,
बस उनके प्यार के लिए जीता हूँ,
अब की मैं खो चूका हूँ खुदको,
सारे चिन्ह और खूबियां मेरी कब और कहाँ खो गयी,
नहीं जानता मैं, अब मैं हूँ क्योंकि तुम हो,
जो सीखा अब तक भूल गया हूँ,
जानते है सब मुझको की जानता हूँ मैं तुमको,
तुम्हारे होने से मैं हूँ,
लोग लेते है नाम मेरा क्योंकि जानता हूँ मैं,
अपनी सारी ताकत गवां चुका हूँ मैं,
पर मज़बूत हूँ तुम्हारे बल से मैं,
अब मैं स्वयम् को चाहता हूँ बहुत ज्यादा तुमसे भी ज्यादा,
क्योंकि मैं, मैं नहीं तुम हो, अब मैं प्यार करता हूँ मैं से,
क्योंकि मैं बन चुका हूँ तुम, बस तुम, सिर्फ तुम....!!!
#सौरभशर्माचिराग
No comments:
Post a Comment