तू इस क़दर कुछ मुझको सताती चली गई,
याद तेरी हर घडी मुझे आती चली गई,
वादे थे तेरे मुझसे कभी ना दूर जाने के,
मगर तू वो सारे वादे भुलाती चली गई,
होंगी कोई ख़ास मजबूरियां तेरी जिंदगी में,
शायद ये दूरी इसीलिए तू बढ़ाती चली गई,
चाहत में ना कुछ और सूझा कभी मुझे,
ये मेरी कलम आंसू रोज बहाती चली गई,
समझ आया न कभी की क्या रही वजह,
जो रुठने के बाद तू मुझे यूँ मनाती चली गई,
"चिराग" बुझ जाते है कभी अपनी गलतियों से भी,
और तू हवाओं पर ही इल्जाम लगाती चली गई...!!!
#सौरभशर्माचिराग
याद तेरी हर घडी मुझे आती चली गई,
वादे थे तेरे मुझसे कभी ना दूर जाने के,
मगर तू वो सारे वादे भुलाती चली गई,
होंगी कोई ख़ास मजबूरियां तेरी जिंदगी में,
शायद ये दूरी इसीलिए तू बढ़ाती चली गई,
चाहत में ना कुछ और सूझा कभी मुझे,
ये मेरी कलम आंसू रोज बहाती चली गई,
समझ आया न कभी की क्या रही वजह,
जो रुठने के बाद तू मुझे यूँ मनाती चली गई,
"चिराग" बुझ जाते है कभी अपनी गलतियों से भी,
और तू हवाओं पर ही इल्जाम लगाती चली गई...!!!
#सौरभशर्माचिराग
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