आबादों को ढूंढ रहा हूँ,
बर्बादों को ढूंढ रहा हूँ,
मुझसे झूठे किये जो तुमने,
उन वादों को ढूंढ रहा हूँ,
जिनमे तुम्ही छुपे रहते हो,
उन यादों को ढूंढ रहा हूँ,
जिनसे जीती बाज़ी हारा,
उन प्यादों को ढूंढ रहा हूँ,
आँखों से सावन बहता है,
पर भादों को ढूंढ रहा हूँ,
रिश्ते की थी जो नीव हमारे,
उन बुनियादों को ढूंढ रहा हूँ।।।
#सौरभशर्माचिराग
बर्बादों को ढूंढ रहा हूँ,
मुझसे झूठे किये जो तुमने,
उन वादों को ढूंढ रहा हूँ,
जिनमे तुम्ही छुपे रहते हो,
उन यादों को ढूंढ रहा हूँ,
जिनसे जीती बाज़ी हारा,
उन प्यादों को ढूंढ रहा हूँ,
आँखों से सावन बहता है,
पर भादों को ढूंढ रहा हूँ,
रिश्ते की थी जो नीव हमारे,
उन बुनियादों को ढूंढ रहा हूँ।।।
#सौरभशर्माचिराग
No comments:
Post a Comment