Saturday, 23 May 2015

*****बारिश मेरी आँखों से अब रूकती नहीं है*****


मेरे जज़्वातों को ये दुनियाँ समझती नहीं है,
बारिश मेरी आँखों से अब रूकती नहीं है।।

कितना भी छुपा लो ये ज़ाहिर हो ही जाती है,
मौहब्बत वो शै है जो किसी से छिपती नहीं है।।

कभी रोता नहीं हूँ तुझे मैं याद कर करके,
क्योंकि रोने से कभी यादें मिटती नहीं है।।

बेईमानी और भ्रष्टाचार है फैला हर जगह अब,
ईमानदारी किसी के पास अब टिकती नहीं है।।

चाहता हूँ हमेशा तेरे साये में रहना क्योंकि,
तेरे बिना "चिराग" की अपनी कोई हस्ती नहीं है।।

यहाँ सब लोग "सौरभ" केवल मौका परस्त है,
पहले सी इंसानियत अब किसी में दिखती नहीं है।।

~~*सौरभ शर्मा चिराग*~~

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