Sunday, 21 June 2015

~~*इधर प्यार के गीत गाना मना है*~~

यहाँ दिल से दिल का लगाना मना है
अगर लग भी जाए तो बताना मना है,
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इधर जालिमों की बस्ती है प्यारे
इधर प्यार के गीत गाना मना है,
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करो भूल लाखों मगर ये समझ लो
यहां भूल को भूल जाना मना है,
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नजर को झुकाकर उन्हें देख भी लो
नजर से नजर को मिलाना मना है,
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न हँसो तोड़कर यहाँ दिल किसी का
यहाँ टूटे दिलों पर मुस्कुराना मना है,
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समझ लो चिराग यही है हकीकत
यहां किसीके लिए खुदको जलाना मना है...!!
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~~सौरभ शर्मा चिराग~~
~~09760569910~~

Thursday, 11 June 2015

परिस्तिथियों का खेल


परिस्तिथियों के बशीभूत होकर,
मेरा सबकुछ चाहते हुए भी,
कुछ ना कर पाना,
बड़ा मजबूर कर देता है,
मानने को, कि कोई और भी है,
जिसकी इच्छा के बिना,
कोई कुछ नही कर सकता,
समर्थ होते हुए भी, जो असमर्थता रहती है,
बड़ी पीड़ादायक होती है,
उसका एहसास भी मुझको समझा जाता है,
कि सबकुछ मेरे हाथ में नही है,
परिस्थितियों की गहराई समझने पर,
मुझे ये समझ आता है,
कि,
अगर परिस्थितियां मेरे हाथ में होती,
कितना अच्छा होता,
हँसना और रोना,
पाना और खोना,
सब पर मेरा अधिकार रहता,
जब भी दर्द और पीड़ा से घिरता,
बदल देता उन परिस्थितियों को...........
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................... कभी आने ना देता,
अपने और अपनों के ज़ीवन में परेशानी,
और कोई मजबूरी, जिससे वो और मैं,
हो जाते दूर, और ना देता कोई मौका,
उस परिस्थिति के पैदा होने का,
जो आज देती है मुझे दर्द,
अपनों से बिछड़ जाने का,
अगर परिस्थितियों को बदलने की,
शक्ति मेरे हाथ में होती,
नही होता वह सब जो हो चुका है....!!
~~~सौरभ शर्मा चिराग~~~

Friday, 5 June 2015

~~क्या हुआ जो हम छप न पाये पुस्तक या अखबारों ~~

इक नई रचना मित्रों आपके समक्ष प्रस्तुत है।।
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क्या हुआ जो हम छप न पाएं, पुस्तक या अखबारों में,
ये क्या कम है, जो अपनी गिनती है खुद्दारों में,
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फितरत से अंजान हूँ लेकिन, फिर भी इतना जानता हूँ,
कुछ दुश्मन निकलेंगे मेरे, छुपे हुए इन यारों में,
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मौके पे जो जान लुटा दें, कैसे भी हालातों में,
अपनी भी यारी रहती है, कुछ ऐसे दिलदारों में,
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वो तो कोई और ही होंगे, जिनका चलता उसपर जोर,
हम तो कही नहीं आते है, हाँ उनके हकदारों में,
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गुरूर हुश्न पर अपने हो तो, ये उसको समझा देना,
उससे अच्छा हुश्न है मिलता, आजकल बाज़ारों में,
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उसने कितना दर्द दिया है, क्या बतलाऊँ मैं तुमको,
बस उसको लिखता रहता हूँ, मैं अपने अशआरों में,
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अंधेरों में रहकर के, एक यही एहसास हुआ है,
एक "चिराग" ही बेहतर है, इन सारे अंधियारों में..!!!
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~~~*सौरभ शर्मा "चिराग"*~~~