Tuesday, 26 May 2015

~~यार तुम भी कमाल करते हो~~

बेवफाओं का ख्याल करते हो
यार तुम भी कमाल करते हो,

तेरा "सानी" नहीं जमाने में
हर सितम बेमिसाल करते हो,

वो अदा तेरी कातिलाना है
जिस अदा से निहाल करते हो,

जो भी होना था हो गया अब तो
क्यों भला तुम मलाल करते हो,

आपका क्या अजब तरीका है
दिल चुराकर हलाल करते हो,

आकर इस कद्र मेरी यादों में
क्यों मेरा जीना मुहाल करते हो,

जानकर सबकुछ मेरे बारे में
क्यों मुझसे सवाल करते हो,

भूल जाओ "चिराग" वो बातें
बेवजह क्यों बवाल करते हो...!!!

~~~पंडित सौरभ शर्मा चिराग~~~
# 9760569910

Saturday, 23 May 2015

*****बारिश मेरी आँखों से अब रूकती नहीं है*****


मेरे जज़्वातों को ये दुनियाँ समझती नहीं है,
बारिश मेरी आँखों से अब रूकती नहीं है।।

कितना भी छुपा लो ये ज़ाहिर हो ही जाती है,
मौहब्बत वो शै है जो किसी से छिपती नहीं है।।

कभी रोता नहीं हूँ तुझे मैं याद कर करके,
क्योंकि रोने से कभी यादें मिटती नहीं है।।

बेईमानी और भ्रष्टाचार है फैला हर जगह अब,
ईमानदारी किसी के पास अब टिकती नहीं है।।

चाहता हूँ हमेशा तेरे साये में रहना क्योंकि,
तेरे बिना "चिराग" की अपनी कोई हस्ती नहीं है।।

यहाँ सब लोग "सौरभ" केवल मौका परस्त है,
पहले सी इंसानियत अब किसी में दिखती नहीं है।।

~~*सौरभ शर्मा चिराग*~~

Wednesday, 6 May 2015

****बरबादों को ढूंढ रहा हूँ****

आबादों को ढूंढ रहा हूँ,
बर्बादों को ढूंढ रहा हूँ,

मुझसे झूठे किये जो तुमने,
उन वादों को ढूंढ रहा हूँ,

जिनमे तुम्ही छुपे रहते हो,
उन यादों को ढूंढ रहा हूँ,

जिनसे जीती बाज़ी हारा,
उन प्यादों को ढूंढ रहा हूँ,

आँखों से सावन बहता है,
पर भादों को ढूंढ रहा हूँ,

रिश्ते की थी जो नीव हमारे,
उन बुनियादों को ढूंढ रहा हूँ।।।

#सौरभशर्माचिराग 

Sunday, 3 May 2015

***मैं हर जन्म में तुझको पाना चाहता हूँ***


मैं तेरे और भी बहुत करीब आना चाहता हूँ,
तेरी धड़कन बन रूह में समाना चाहता हूँ,
.
तू भी कर लेना मुझे अपने वजूद में शामिल,
क्योंकि मैं तेरी साँसों में बस जाना चाहता हूँ,
.
जो प्यार के गीत मैं अब तक गुनगुनाता था,
अब वही मैं तेरे होंठों पर सजाना चाहता हूँ,
.
तेरी बाँहों में ही रुखसत होऊं इस दुनिया से,
क्योंकि हर जनम में मैं तुझे ही पाना चाहता हूँ........

*****सौरभ शर्मा*****

****याद तेरी हर घडी मुझे आती चली गई****

तू इस क़दर कुछ मुझको सताती चली गई,
याद तेरी हर घडी मुझे आती चली गई,

वादे थे तेरे मुझसे कभी ना दूर जाने के,
मगर तू वो सारे वादे भुलाती चली गई,

होंगी कोई ख़ास मजबूरियां तेरी जिंदगी में,
शायद ये दूरी इसीलिए तू बढ़ाती चली गई,

चाहत में ना कुछ और सूझा कभी मुझे,
ये मेरी कलम आंसू रोज बहाती चली गई,

समझ आया न कभी की क्या रही वजह,
जो रुठने के बाद तू मुझे यूँ मनाती चली गई,

"चिराग" बुझ जाते है कभी अपनी गलतियों से भी,
और तू हवाओं पर ही इल्जाम लगाती चली गई...!!!

#सौरभशर्माचिराग